JUSTICE AT LAST.......HINGLISH DRAMA.

Jul 23 2008  | Views 94 |  Comments  (2)



JUSTICE AT LAST..... 


             (परदा खुलता है)
Act-1

( वेरोनिका मन्च के बीचो बीच दर्शको की तरफ् पीठ करके बैठी है, बैक ग्राउड मे म्युजिक चलता है। म्युजिक खत्म होते ही सभी पात्र चीखते-चिल्लाते मन्च पर प्रवेश करते है)

सभी पात्र -  सभी अभियुक्त बरी हो गये, सभी अभियुक्त छुट गये, किसी को भी सजा नही मिली, सब बरी हो गये, जज ने कहा कोई सबुत नही है, जज ने कहा कोई गवाह नही है, खून तो हुआ था---!!!! पर गवाह नही है, क्या हुआ उन दर्जनो गवाहो का---? अपराध तो हुआ है पर सबुत नही है। क्या हुआ उस पिस्तौल का----? खून से लथपथ कपडो का--?, जो मुश्किल से एक गवाह मिला वो कहता है--- उसे हिन्दी नही आती। हिन्दी बोलनी नही आती पर हिन्दी फिल्मो मे काम करता है।---!!! क्या इन्साफ् ताकतवर और अमीर लोगो की जेब मे है--?

( सन्नाटा छा जाता है, सभी पात्र वेरोनिका को चारो तरफ् से घेर लेते है। घेरे को चीरते हुए वेरोनिका मन्च के सामने आ जाती है।)

वेरोनिका - मुझे न्याय चाहिये, जब तक मुझे न्याय नही मिलता-- मै-- नही मरुगी , मै नही मर सकती, मै नयाय के लिये लडुन्गी ,मुझे मालुम है मुझे न्याय मिलकर रहेगा, मेरा खून हुआ था, सौकडो लोग वहा जमा थे, कई जानी मानी हस्तिया, पुलिस अधिकारी,मेरे कई दोस्त्, कई जानकार वहा मौजुद थे। (झल्लाकर्) तुम भी थे, तुम भी थे, तुम भी थे , तुम भी तो थे, तुम सभी वहा मौजुद थे। फिर कैसे कोई गवाह नही मिला--? मुझे गोली मारी गई थी, मेरा खून बहा था , क्या वहा गोली नही मिली--? क्या मेरा खून फर्श पर नही बहा--? क्यो----क्यो--- तुम सब खामोश क्युन हो--? तुम सब क्या अन्धे-बहरे हो गये हो---? बताओ ---जवाब दो----

देव् -   वेरोनिका....! मै पार्टी मे थोडा लेट पहुचा था। मैने कुछ नही देखा।
राहुल् - मैने कुछ लोगो को भागते हुए देखा इससे ज्यादा मै कुछ नही देख सका।
सन्कल्प् -  मैने चीखने चिल्लाने की आवाज सुनी पर दिखाई कुछ भी नही दिया।
जय -   मैने गोली चलने की आवाज सुनी पर इससे ज्यादा मुझे कुछ भी नही पता चल सका।
प्रशान्त् -  मैने कुछ लोगो को कहते सुना था खून हो गया-- खून हो गया--।
खुशी -   मै तो बाथरुम मे थी।
ज्योति -  मै तो डान्स फ्लोर पे डान्स कर रही थी मुझे तो कुछ पता नही चला।

वेरोनिका-  तुम सभी वहा मौजुद थे पर किसी ने मेरे कातिलो को नही देखा, कातिलो ने जो मेरे साथ बर्ताव किया वह किसी को नही दिखा, मुझ पर गोली चलायी गयी तुम लोगो को वो भी नही दिखा, मेरी चीख्---- तुम्हे मेरी चीख भी नही सुनायी पडी क्या-- क्या तुम सभी मर चुके थे।

                                         (सन्नाटा छा जाता है) 

                                                    Act-2

(बर्थ डे पार्टी का दृश्य म्युजिक चल रहा था पार्टी अपने फुल्-फ्लो मे है। तभी अचानक वही अपराधी जिन्होने वेरोनिका की हत्या की थी फिर से हो हल्ला मचाना शुरु कर देते है। और एक बार फिर गोली चलती है और एक लडकी की मौत हो जाती है। अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो जाता है)

कोरस् -   भागो-भागो, खून्-खून्,भागो-भागो, खून खून्।
वेरोनिका -  भागो मत्--! उसे देखो, उसे उठाओ, उसकी मदद करो। अस्पताल्--- इसे अस्पताल ले जाना होगा। प्लीज मेरी मदद करो----प्लीज (चीख्ती है)

देव् -   वेरोनिक ,बेकार के पचडे मे मत पडो, तुम भुल गई क्या---? वो सब्---!!!

राहुल् -  नही--नही---हमे इसे बचाना होगा, हम इस तरह इसे इस हाल मे छोड कर नही जा सकते।

सन्कल्प् - अभी---अभी ---शायद इसकी सान्स चल रही है।
जय -  यस्----यस्-- यू आर राईट अभी यह जिन्दा है।
प्रशान्त् - (वेरोनिका से) तुम्--तुम कार लेकर आओ हम इसे उठाते है, जल्दी करो।
गर्व् - कोई पुलिस को फोन करो जल्दी।
खुशी - कोई--कोई इसके घर वालो को फोन करके बताओ जल्दी जल्दी।
ज्योती - जल्दी करो जल्दी करो समय निकला जा रहा है।
सन्कल्प -  हैलो पुलिस---! यहा पर कुछ लडको ने एक लडकी पर गोली चला दी है। उसकी हालत बहुत गम्भीर है आप प्लीज--प्लीज जल्दी आइए।

राहुल्- अरे--!! अभी तक कोई कार लेकर क्यो नही आया जल्दी करो---जल्दी वरना बहुत देर हो जायेगी।

पुलिस - हठिये---हठिये-- सब हठ जाइए। प्लीज स्टे अवे फ्राम द बाडी। प्लीज लेट अस डु अवर जाब्, गो बैक---गो बैक।
वेरोनिका- इसे कुछ लोगो ने बेवजह गोली मार दी, मैने देखा है---मैने-- बेवजह ---इसका कोई कसुर नही था, उन्होने इसे फिर भी गोली मार दी।

पुलिस् - आप कौन है--?आप इसकी क्या लगती है--?
पुलिस - आप इसे जानती है---? क्या यह आपकी दोस्त है--? (लाश के करीब जाता है) ओह्---! आई मीन--- थी।

वेरोनिका -  नो----नो---- यह नही हो सकता वो बार बार बेगुनाह की जान नही ले सकता। वो फिर से एक और बेगुनाह की मौत का कारण नही बन सकते। ये ---मर नही सकती--- इसकी कोई गलती नही थी( देव्, राहुल्, प्रशान्त्, जय वेरोनिका को पकड लेते है)।
पुलिस- (शरीर को देखता है अच्छी तरह मुआईना करता है और अपनी डायरी मे कुछ नोट करता है)हवलदार इसकी बाडी को पोस्ट्मार्ट्म के लिये भेज दो।
हवलदार् -  सर्--! अभी इन्तजाम करता हु।
पुलिस् - और आप्( वेरोनिक से) आप्--आप--- आप्-- आप (देव्, जय्, प्रशान्त्, राहुल्, गर्व ,खुशी, ज्योति)थाने मे आकर अपना बयान दर्ज कराए।

                                                   (लाईटस आफ्)

                                                   Act-3

 ( सभी पात्र मन्च पर आते है। थाने का दृश्य पुलिस वाला चश्मदीद गवाहो के बयान दर्ज करता है)

पुलिस्- आपका नाम ?

वेरोनिका- वेरोनिका।

पुलिस्- आपके पिता का नाम्।

वेरोनिका- राबर्ट ।

पुलिस् - Tell me what happened that night ?

वेरोनिका - Sir, we were celebrating our friends birhtday suddenly 4 people came , they asked something from my friend which she denied and...and....they shot her... they.. killed her. 

पुलिस् - आपने अपनी आन्खो से देखा उन्हे गोली चलाते, were you drunk ? Did you see that from your naked eye? Can you identify them? How do they look like?

वेरोनिका - Yes, I can . If I see them again . I can easily identify them .

पुलिस् - Okay Okay that time will tell us. Were they hooligans or from good family?

वेरोनिका- They looked as they belong to very good family but behaved like monsters . They were arrogant, short tempered and were trying to show their power to an innocent girl. 

पुलिस्- Okay , thank you , now you can go. We will trouble you as and when need you.

वेरोनिका- No problem sir , I am ready to come and cooperate with you. I am not scared of them. I want the culprits behind the bars.

पुलिस्- हा-- जी-- आप लोग बताईये आप लोगो ने क्या देखा?

देव्- सर--!, मैने देखा की कुछ लोग हमारे दोस्त को जिसकी मौत हो चुकी है से किसी बात पर बहस कर रहे है और वो किसी चीज के लिये मना कर रही है।
राहुल्- तभी, सर एक शख्स अपनी कमर के पास से पिस्टल निकालकर गोली चला देता है जो मेरे दोस्त के पेट मे लगी।
देव्- राहुल्- (एक साथ ) जिससे उसकी मौत हो गयी।
सन्कल्प- सर्, मैने देखा कि कुछ लोग दौड्ते हुए गेट की तरफ् जा रहे है और एक लड्की जमीन पर गिरी पडी है। जिसके पेट से खून बह रहा है।
जय- जब हम लोग उसके करीब पहुचे तो देखा कि हमारी दोस्त को किसी ने गोली मारी है।
पुलिस्- हा, आप दोनो ने क्या देखा ( प्रशान्त और गर्व से)
प्रशान्त- सर्, मैने तो पटाखे जैसी आवाज सुनी और लोगो को यह कहते सुना कि खून हो गया है खून हो गया है।
गर्व्- सर, मै तो बहुत डर गया था। मैने कुछ नही देखा पर बाद मे मुझे पता चला कि हमारे दोस्त को किसी ने गोली मार दी है।
पुलिस्- चलो अभी आप लोग जाओ। पर जरुरत पड्ने पर फिर आना पडेगा।

( दो पुलिस वाले मन्च पर रह्ते है सभी पात्र चले जाते है तभी दो नेता चेला-चपाटी के साथ मन्च पर आते है)

नेता- आप मुझे जानते है( पुलिस से)
पुलिस्- हा जी जानता हु।
नेता- बताएये हम कौन है?
पुलिस्- लगते तो इन्सान ही है बाकि आप ही बता दीजिये।
नेता- झुन्झलाहट से, बदतमीज तुम्हे अपनी नौकरी प्यारी नही है।
पुलिस्- हा भई बहुत प्यारी है इससे आपको क्यो तकलीफ् हो रही है।
नेता- सुनो और बहुत गौर से सुनो तुम्हारे एरिया मे जो आय मर्डर हुआ है ---उसमे कुछ लोगो ने मेरे बेटे का नाम लिया है-- ख्याल रहे मामला अभी इसी वक्त यही पर खत्म हो जाये।
चमचा- अभी तुम्हे कुछ और बताने की जरुरत है। इनके पावर का अन्दाज तो होगा ही तुम्हे।
नेता- चलो ज्यादा बात नही, ध्यान रहे जो मैने बोला है।
( नेता और चमचा मन्च से बाहर चले जाते है पुलिस वाले उन्हे जाते हुए घुरते है।)
                                                पार्ट-4

नेता - वकील साहब, आप केस सम्हाल लेगे ना।
चमचा - आपने फाईल तो पढ ही ली होगी।( फाईल की तरफ् ईशारा करते हुए)
वकील्- डोन्ट शो मि द फाईल्। लेट मि सी द जज फर्स्ट।
चमचा - हा--हा--हा---बहुत खूब ,वकील साहब बहुत सयाने है।
वकील् - आप चिन्ता ना करे नेता जी मै हुन ना।
नेता - इसमे मेरा बेटा फसा हुआ है वकील साहब। आपको केस जीतना होगा।
वकील -आई नो हाउ टु विन ए केस्। बस आप मेरा ख्याल रखिये मैन आपका ख्याल रखुन्गा।
नेता-चमचा - जी--जी- बहुत बहुत शुक्रिया आपका।
(वेरोनिका और उसके साथी मन्च पर आते है)

वेरोनिका - (वकील से)सर, आपने केस तो स्टडी कर लिया है अच्छे से।
वकील् - डोन्ट वरी , वी आर फाईटिग फार द ट्रुथ्, गाड ईस विद अस। वि विल विन्।
वेरोनिका - सर, जज साहब तो अच्छे है ना।
वकील् - I tell you what , judges are in many respects,like parents, you have to give them a good enough reason to do what you want .
जय- सर्, हमारा कानून्, नही मालुम कैसा है। मुझे तो समझ ही नही आता कानुन हो तो कैसा हो जिससे ये मुजरिम बच ना सके।
गर्व् - You know what, law should be like clothes, they should be made to fit the people they are meant to serve.
खुशी - Sir, here one fight for justice and get it after his death.
वेरोनिका-May be you are right but wheels of justice moves slowly but surely . Best of luck sir. We have full faith in you and our Judiciary.
गर्व् - Thanks.

                                                (LIGHTS OFF)

                                                    Act- 5

                                     (मन्च पर कोर्ट रुम का दृश्य )

JUDGE-POLICE-PROSECUTOR-DEFENCE LAWYER-LEADER-DOCTOR.(All are present in the court room.)

Judge- Yes, prosecution, you proceed with your case. What you have to say?

Prosecutor- My Lord, Prima-facie its a very strong case against the accused persons. We have got medical report , forensic expert opinion in our favour. Investigation officer has gathered some very crucial and strong evidences against the accused persons. Eye witnesses are also present today.

Judge- ( Pointing towards accused persons) where is your lawyer?

Accused persons- Sir, he must be coming in few seconds.

Defence lawyer- My Lord, I am here, I am sorry My Lord, I had a very important case in the High Court . I just finished it and rushed here.

Judge- Yes...Yes..., I know.. I Know...today you have to argue on charge under section 302, 120 (B) and 34 of IPC.

Def. Lawyer- My Lord.

Judge- Now proceed further.

Def. Lawyer- My Lord, my clients are innocent, my clients are falsely implicated in this case seeing their reputation , status, and money . Some people want to blackmail my clients.

Prosecutor- Objection, My Lord.

Judge- Objection overrulled.

Prosecutor- My Lord I would like to call Doctor first  in the dock for the his witness.

Dr.- In the name of God I will speak the truth and only the truth and nothing else.
Prosecutor- What does your report say Dr.?

Dr.- Sir, there was a bulet injury in the stomach of deceased which is caused by a pistol from 2 feet distance on the lower abdomen.

Prosecutor - Thanks Dr. ,Witness is yours.( Pointing towards Def. Lawyer.)

Def. Lawyer - How Many bullet injury marks were there? One , two or three.

Dr.- Only one.

Defence lawer- Dr. Is it possible that a person can die if only one bullet is shot.?
Dr.- What kind of question is this?

Def. LAWYER- You answr what I have asked.

Dr.- It Depends.

Defence Lawyer- Depends? depends means what? You mean to say deceased might be suffering from some chronic ailment. Are you suggesting that ?

Dr.- No.

Def. Lawyer- No! a bullet shot is sufficient to cause death of a healthy person.

Dr.- Again I say It depends.

Defence Lawyer - My Lord , deceased was suffering from some accute chronic decease and when the bullet was shot may be deceased herself triggered the pistol in the tug-o-war and  she fell down and died because of her chronic ailment and not because of excess bleeding . That is all My Lord.

Judge- Court is adjourned for today . Give them date after two weeks.

                                                       (Lights Off) 

                                                          Act- 6

वेरोनिका- तुम लोगो ने देखा वह वकील कैसे डाक्टर के बयान के अर्थ का अनर्थ निकाल रहा था ।
         हि वाज लिट्र्ली ट्राइन्ग टू पुट हिज वर्ड्स ईन डाक्टर्स माउथ। वह बहुत कपटी और चतुर लग रहा था।
देव् - हा, तुम ठीक कह रही हो।
राहुल् - ना जाने ईस केस मे क्या होगा।
सन्कल्प् - कुछ नही, होना क्या है ईस केस मे भी सभी अभियुक्तो को बरी कर दिया जायेगा।
जय् - आई ओ , भी कुछ नही कर पायेगा। हमने डिफेस लायर को देख ही लिया है । वह कितना घाघ लग रहा था।

गर्व्- ऐसा कुछ भी नही होगा मैने आई ओ से बात की है उसने कहा है कि उसने अपने केस की पुरी तैयारी की है।

खुशी - हा,हा गर्व ठीक कह रहा है।

ज्योती- But you know what " Laws are spider webs they hold the weak and delicate who are caught in their meshes, but are torn in pieces by rich and powerful.

वेरोनिका-Hummmm....hummm.. Lets hope for the best , we must try our best to get justice for our friend . You know:- The law sometime sleeps but never die.

गर्व्- Yes certainly, we will try our best.

कोरस्-  Yes ,we will. We will fight till the very end.

                                                          (Lights Off)


                                                (Scene of the Court room)

Judge- Yes......... Both the parties are present?

Def.Lawyer And Prosecutor-  My Lord .

Judge- Then Proceed.

Prosecutor- My Lord , I would like to call I.O. in the dock.

Judge- Yes

Prosecutor- Tell the court what your investigation report says.

I.O.-    सर्, चश्मदीद गवाहो के बयान और उनके द्वारा बताए गए हुलिये ही काफी नही थे । वेरोनिका नाम की गवाह ने अभियुक्तो का नाम स्पष्ट रुप से बताया था ,जिससे अभियुक्तो को पकडने मे आसानी हुयी। सारे अभियुक्तो का सम्बन्ध काफी सम्भ्रान्त घरो से है, जिनमे से एक तो काफी ताकतवर राज्नैतिक घराने से ताल्लुक रखता है। शुरुवाती छान्-बीन के समय इन्ही वजहो से काफी समस्या पैदा हुयी।
प्रासीक्युटर्- आप गवाह से सवाल कर सकते है( बचाव पक्ष से)

बचाव पक्ष्-गोली किसने चलायी थी।

आई ओ- उसने( मुख्य आरोपी की तरफ् इशारा करते हुए)

बचाव पक्ष्- फिर ईन तीन लोगो ने क्या किया था।
आई ओ- अबेट्मेन्ट, इन्ही तीनो ने मुख्य आरोपी को अपराध के लिये उकसाया था।
बचाव पक्ष्- अबेटमेन्ट्!!!!!!! या फि मृतिका ने ईन्हे ऐसा करने के लिये उकसाया था।
बचाव पक्ष्- गोली किस बात पर चली थी।

आई ओ- मृतिका और अभियुक्त गणो की किसी बात पर कहा-सुनी हो गयी थी। जरा सी बात को लेकर अभियुक्त गणो ने आव देखा ना ताव और गोली चला दी।
बचाव पक्ष्- पर मेरे मुवक्किल तो वहा उस समय मौजुद ही नही थेऔर अगर आप्की बात सच भी है तो रेस्टोरेन्ट के सेक्योरिटी गार्ड और वहा मौजुद तमाम लोग जिन्मे कैइ जानी-मानी हस्तिया ,पुलिस अधिकारी और करीब २०० मेहमान शामिल थे उन्मे से किसी भी ने अभियुक्तो को पकड्ने क प्रयास क्यो न्बही किया उन्हे वहा से भागने कैसे दे दिया। या फिर माजरा कुछ और ही था। कही ऐसा तो नही की मृतिका ही मेरे मुअकिक्लो मे से किसी को जान से मारना चाह्ती थी और इसी गुत्थम्-गुत्थी मे गोली चल् गयी और अफसोस गोली उस्के पेट मे लग गयी।
आई ओ- जी---जी---जी--(घबराकर)गोली मुख्य आरोपी ने ही चलायी थी।
बचाव पक्ष्- अगर आप किसी पर २ फीट दुर से खडे होकर गोली चलायेगे तो गोली उसके पेट मे लगेगी या सीने मे।
आई ओ- सीने मे---(घबरा जाता है) नही नही मुझे नही पता। कही भी लग सकती है।
बचाव पक्ष्- दैट इज आल माई लोर्ड्। जब तक गुत्थ्म गुत्थी न हो कोई भी क्रिमिनल अगर किसी को ईतनी पास से गोली मारेगा तो उसका निशाना पेट से उपर के हिस्से मे होगा ना कि इस केस की तरह लोअर अब्डामिन मे।
जज- चश्मदीद गवाह पेश किये जाये।
प्रासीक्युट्‍- मै सबसे पहले गवाह वेरोनिका को बुलाना चाहता हु।
वेरोनिका- मै जो कहुगी सच कहुगी और सच के सिवा कुछ नही कहुगी।
प्रासिक्युटर-आपने क्या देखा?
वेरोनिका- पार्टी चल रही थी, सभी लोग खुश थे और खुब मजा कर रहे थे। तभी अचानक इन चारो ने किसी बात पर मेरी दोस्त से बहस शुरु कर दी और उनमे से एक जिसका नाम शशांक है ने अपने कमर के पास से पिस्ट्ल निकाल ली। पिस्ट्ल निकालते देख  मेरी दोस्त ने उसका हाथ पकडने की कोशिश की इस पर बाकी तीनो अभियुक्तो ने मेरि दोस्त को धक्का दिया जिससे वह थोडी दुर जाकर फर्श पर गिर गयी और तब ही गोली चलने की आवाज आयी जो मेरे दोस्त के पेट पर लगी और वह उस्के बाद उठ ही नही सकी।
प्रासीक्युटर - आप गवाह से सवाल पुछ सकते है( बचाव पक्ष से)
बचाव पक्ष् - आप वहां क्या कर रही थीं ?

वेरोनिका- मै भी वहा उस पार्टी मे ईनवाइट की गयी थी।
बचाव पक्ष्- आपने कहा गोली चलने की आवाज आयी। पर क्या आपने किसी को गोली चलाते देखा?
वेरोनिका - हां मैने इसे ही गोली चलाते देखा अपनी आन्खो के सामने मैने अपनी दोस्त को तडप तडप के दम तोडते देखा है।
बचाव पक्ष् - तडप्-तडप के मरते देखा तो उसे बाचाने की कोशिश क्यु नही की?
वेरोनिका - हमने कोशिश की।, हमने पुलिस को फोन किया, मेरे दोस्त पार्किंग से कार निकाल्ने गये थे।पर तब तक काफी देर हो चुकी थी।
बचाव पक्ष् - कितनी गोलिया चली थी ?
वेरोनिका - जी एक गोली चली थी।
बचाव पक्ष् - आप उस समय कितनी दुर पर खडी थी ? क्या आपने शराब भी पी रखी थी ?
वेरोनिका- चीख के  नो--नो--- आई डोन्ट ड्रींक । मै करीब १० फुट दुर खडी थी ।
बचाव पक्ष्- क्या उस समय रौशनी ठीक्-ठीक थी ? आपको पार्टी लाईट मे मेरे मुवक्किलो का चेहरा साफ् साफ् नजर आ गया था।
वेरोनिका- जी--जी-- मै इनका चेहरा कैसे भुल सकती हु इन्हे तो एक बार पहले भी बरी किया जा चुका है, गवाहो और सबुतो के अभाव मे।पर मै-- मै--- इस बार इन्हे सजा जरुर दिला कर रहुगीं। वरना, कल फिर ये किसी मासुम की जिन्दगी के साथ खेलवाड करेंगे।
बचाव पक्ष -  बकवास!!!!!  बताओ तुम इन्हे झुठे केस मे फंसवा कर क्या चाह्ती हो ? तुम्हे पैसा चाहिये ? बताओ तुम्हे कितना पैसा चाहिये ?
वेरोनिका -  स्टाप ईट्!!! आई सेड स्टाप ईट्!!! मुझे कुछ नही चाहिये। आइ वान्ट जस्टिस । आई जस्ट वान्ट जस्टिस । मुझे न्याय चाहिये। इस देश मे जहा कानुन आमीरो की तिजोरियो मे बन्द है। जहा ताकतवर लोग अपराध करते है , और कानून उन्हे सबुतो और गवाहो के अभाव मे छोड देता है। पर --पर -- मुझे विश्वास है सारे लोग बिके हुए नही हैं। मै आप ---आप्-- I want to tell you all....its not true. Justice is there . Justice can be delayed but it is never denied . God is there. There are good people in our judiciary and legal system . There are very good lawyers who take pain to get you justice . There are good cops who burn their night and work 24 hours to make your case strong. There are friends who satand by you to support you in the hour of needs and when you are dejected and alone. I am confident we will get justice . You will see , you..you....you all will see we will get Justice.

                                                     (LIGHTS OFF) 

(COURT ROOM SCENE JUDGE DELIVERS THE JUDGEMENT)

JUDGE- After analysing all the facts and taking circumstancial evidences into consideration I am of the view that the accused persons are guilty.

Dr. opined that cause of death was a bullet injury and the body of the deceased had a bullet injury.

On completion of the investigation , and after reading all statements made by witnesses ,it is my finding that every needle of allegation is pointing towards the guilt of the accused persons.

PWs , also stated in the court  that they heard the pistol shot and Pw1 saw the prime accused commiting the crime . In my view circumstantial evidences also support and corroborate the prosecution story.

In view of all the facts the prosecution is successful in bringing home the guilty and the circumstances brought on record are clearly showing that the accused persons are the author of the crime. Therefore, it is hereby ordered that all the accused persons will undergo rigorous life imprisonment  and each of the accused persons will have to deposit Rs 5 lacs as penalty.

COURT IS ADJOURNED.

Every one- Great..... Great... Bravo... Bravo....

(Court room scene ends)
 
Dev- Why did Judge acquite them earlier?

Veronica- Do you know one thing . The burden of proof to  a particular thing is always upon the prosecution . It can not be shifted . The accused is not require to prove his innocence. The basic criminal jurisprudence says that there is always a presumption of innocence in favour of the accused. 
                                                                  The Law presumes the innocence of a person charged with a crime until the contrary is proved to a reasonable certainty .

Rahul-- What about Circumstantial evidence ?

Veronica- The Circumstantance on which the procecution relied do not make out a complete chain . There were unfolded mysteries in the prosecution case. Unfortunately the court provided the umbrella of benefit of doubt to the accused persons in the earlier case. But this time they could not escape.
Khushi- Thank God . Finally they are punished though late. 

Veronica- Yes, you know what , hopelessness is indirectly denial of the existence of GOD . I always believed in God . I was always hopeful. I had been telling you all " Wheels of justive moves slowly but surely ". I have got justice...... I got it. I got it. You see I got it. 

[सभी लोग झुमते - गाते मस्ती मे डुब जाते है और अन्त मे एक सकारात्मक गीत के साथ नाट्क का  END हो जाता है]


Disclaimer:- All the characters depicted here are fictitious and any resemblance to living or dead are purely co incidental .

© writer at heart., all rights reserved.

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