"देश का मासूम बचपन, chhote chhote haath हाथो मे हथौडी,
नगे पैर ,तपती धूप,झुलसे चेहरे,
खेलने के दिन, ईट्-भट्टो मे बीतते,
मुह मे धूल भरी,खाने को एक निवाला नही,
मा सिर पर ईट उठाती ,उसका आन्चल पकडे पिछे पिछे चलता,
देश का मासूम बचपन,
समाज देखता आन्खे फाड्-फाड बना निर्मोही,
मा दिन भर काम करती ,तपती धूप मे पेड के नीचे सोया,
देश का मासूम बचपन,
रात काली स्याह है,सुबह की बस आस है,
कभी मा के दुध के लिये रोता, कभी मा के प्यार के लिये तड्पता,
देश का मासूम बचपन्,
मानवता शर्मसार होती,देखती नही उसकी तकलीफ,
छोटे छोटे हाथ, बडे-बडे पत्थर,
चोटिल होते हाथ,घायल होता राष्ट्र,
छोटे छोटे हाथ ,हास्पिटल की नीव रखते,
न्यायालयो की दीवार बनाते,होटलो का लेटर बनाते,
ईट पत्थर सिर पर उठाते,देश का मासूम बचपन,
कप-प्लेट्स धोते,कचरे उठाते,
सडक किनारे भीख मागता,देश का मासूम बचपन,
सुखा चेहरा,सुखी रोटी की आस मे,
तन मे कपडे नही,आन्खो मे सपने पाले,
देश का मासूम बचपन,
छोटे छोटे हाथ मा का काम मे हाथ बटाते,
तपती धूप मे पत्थर तोड्ते, सपने बुनते,
खाली पेट सोते,नीद आती,सपने आते,
सपनो मे सुनहरा भविष्य दिखता,
तन मे कपडे ,भरा पेट, हाथो मे स्कूल का बस्ता,
सर पर छ्त्,सोने को बिछौना,
छोटे छोटे हाथ,दिल के बाद्शाह,
चान्द तारो की सम्पति के मालिक,
रास्तो पर सोते,पुरा आसमान अपना समझते,
देश का मासूम बचपन, chhote chhote haath ,हाथो मे हथौडी।"

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